केंद्रीय हिंदी निदेशालय (उच्चतर शिक्षा विभाग)
दृश्य-श्रव्य
हिंदी ऑडियो कैसेट्स
हिंदी वीडियो कैसेट्स
सी.डी.
अन्य सूचनाऍ
डाउनलोड फाम
 नई सूचनाऍ
आकॉइव्स
मुख्य पृष्ठ
वित्‍तीय सहायता
   
 

हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं को वित्तीय सहायता

 
 

भूमिका

हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं को सहायता देने के लिए भारत सरकार ने पहली पंचवर्षीय योजना में इसे एक योजना के रूप में सम्मिलित किया । दूसरी, तीसरी, चौथी, पाँचवीं, छठी, सातवीं तथा आठवीं पंचवर्षीय योजनाओं में भी इसे चालू रखा गया । हिंदी के प्रचार-प्रसार की से यह योजना बहुत ही उपयोगी हुई है ।

क्षेत्र

इस योजना के अंतर्गत संगठनों/ शैक्षणिक संस्थाओं को हिंदी के प्रचार और प्रसार के वर्तमान कार्यक्रम चालू रखने और उन्हें विस्तृत करने अथवा नए कार्य प्रारंभ करने के लिए सहायता दी जाती है । ऐसे कार्यों का संबंध निम्नलिखित परियोजनाओं में से किसी से भी हो सकता है :-
1. हिंदी के प्रचार-प्रसार से संबंधित कार्यक्रमों के लिए सहायता :-
 
(क) हिंदीतर-भाषी राज्यों में हिंदीतर-भाषी जनता को हिंदी पढ़ाने के लिए कक्षाओं का आयोजन करना ।
(ख) हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में हिंदी अध्यापकों और प्रचारकों को प्रशिक्षण और उनकी
(ग) हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में पुस्तकालय और वाचनालय स्थापित करना और चलाना ।
(घ) हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार के लिए पुस्तकों, रिकार्ड किए कैसेटों और दृश्य-श्रव्य ( मुद्रित और अमुद्रित ) सामग्री की खरीद ।
(ङ) हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में प्रमुख हिंदी के व्याख्यानों, हिंदी में प्रतियोगिताओं, वाद-विवादों, नाटकों आदि का आयोजन करना ।
(च) हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में हिंदी के विकास के लिए हिंदी पुस्तकें और ऐसी अन्य सामग्री तैयार करना और प्रकाशित करना ।
(छ) अखिल भारतीय स्तर की संस्थाओं को बनाए रखना ।
(ज) हिंदी पत्र - पत्रिकाएँ तैयार करना और उन्हें प्रकाशित करना ।
(झ) हिंदी में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित के लिए ऐसे छात्रों को पुरस्कार देना जिनकी मातृभाषा हिंदी के अलावा कोई अन्य भाषा हो ।
(ञ) हिंदी टंकण और आशुलिपि की मान्यता कक्षाएँ चलाना और हिंदी टंकण तथा आशुलिपि प्रतियोगिताओं का आयोजन करना ।
(ट) सम्मेलन, संगोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन, शिविर, पुस्तक प्रदर्शनियों आदि का हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में आयोजन करना ।
(ठ) हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में हिंदी माध्यम के स्कूलों को सहायता प्रदान करना ।
(ड) हिंदीतर-भाषी राज्यों में हिंदी माध्यम के स्कूलों के लिए बजट की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें तदर्थ आधार पर अनुदान अदा किया जाना बशर्तें कि बाद वाले सहायता अनुदान नियमों के अंतर्गत उनके स्थान पर कोई अन्य अनुदान नहीं दिया जाएगा । बजट की कमी को राज्य सरकार अनुप्रमाणित किया जाना आवाश्यक है जिसे राज्य सरकार से सामान्यतया ग्राहय अनुदान में से पूरा किया जाएगा ।
(ढ़) भारत के संविधान के अनुच्छेद 351 में अनुस्यूत को पूरा करने के लिए हिंदी में मान्यता अनुसंधान, दस्तावेज अथवा कृतियों के प्रकाशन और/ अथवा राजभाषा अधिनियम और नियमावलियों के कार्यान्वयन संबंधी समस्या का समाधान करना ।
(ण) किसी प्रकार के अन्य क्रियाकलाप जो हिंदी को बनाने तथा उसके प्रचार और प्रसार के अनुरूप हों ।
  अनुदान के लिए शर्तें
  हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सरकारी सहायता करने हेतु पात्रता की शर्त यह होगी कि संस्था/ संगठन को संविधान में यथा परिभाषित हिंदी की विचारधारा को रूप से स्वीकार करना होगा ।
  संबंधित संस्था/ संगठन को इसके बाद योजना में यथा उल्लिखित शर्तों का अनुपालन करना अपेक्षित होगा और भारत सरकार समय-समय पर यथानिर्धारित शर्तों को भी स्वीकार करना होगा । इस योजना के अंतर्गत पिछले देयादेय अथवा ऋणों का भुगतान करने के लिए अनुदान नहीं दिया जाएगा ।
  स्वैच्छिक हिंदी संगठनों/ संस्थाओं को हिंदी के प्रचार–प्रसार के लिए स्वीकृत अनुदानों के संबंध में निम्नलिखित  शर्तों का पालन करना होगा :-
 
(1) सहायता करने वाली किसी भी संस्था की जाँच केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय या राज्य शिक्षा विभाग या भारतीय लेखा परीक्षा और लेखा विभाग का अधिकारी किसी भी समय कर सकता है । जब सरकार दिया गया अनुदान 25,000/- रूपए से अधिक हो तो संस्था की जाँच वहाँ जाकर अवश्य की जानी चाहिए ।
(2) अनुदान करने से पहले संस्था को इस बात का जिम्मा लेना होगा कि जिस काम के लिए सहायता दी गई है उसे सरकार नियत किए गए समय में पूरा किया जाएगा और अनुदान का केवल उसी के लिए उपयोग किया जाएगा जिसके लिए वह स्वीकृत किया गया हो । ऐसा न करने पर संस्था को पूरा अनुदान केंद्रीय सरकार निर्धारित ब्याज के साथ सरकार को वापस करना होगा ।
(3) केंद्रीय सरकार से अनुदान करने वाली संस्था अपने को अथवा अपनी को भारत सरकार की अनुमति के बिना किसी / संस्था/ संगठन के नाम हस्तांतरित नहीं कर सकती । यदि किसी समय संस्था बंद हो जाए तो केंद्रीय सरकार के अनुदान से बनाई गई या खरीदा गया सामान भारत सरकार का हो जाएगा ।
(4) संस्था को केंद्रीय सरकार के अनुदान से पूर्ण या आंशिक रूप से अर्जित या बनाई गई के जाँचे हुए लेखों को निर्धारित प्रोफार्मा में रखना होगा और उसकी एक प्रति निर्धारित तारीख या उचित समय के अंदर केंद्रीय हिंदी निदेशालय, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा विभाग को रिकार्ड के लिए भेजनी होगी । उन के अलावा, जिनके लिए अनुदान दिया गया हो, इस प्रकार बनाई गई  , भारत सरकार की अनुमति के बिना न तो बेची जा सकती है, न गिरवी रखी जा सकती है, न ही उसका उपयोग किया जा सकता है ।
(5) संस्था के लेखे उचित रूप से रखे जाने चाहिए और माँगे जाने पर पेश किए जाने चाहिए । इन लेखों की जाँच, नियंत्रक और लेखा परीक्षक, जब चाहे तब कर सकता है ।
(6) यदि भारत सरकार/ राज्य सरकार को यह हो जाए कि संस्था का प्रबंध सुचारू रूप से नहीं हो रहा है या स्वीकृत धन का उपयोग अनुमोदित के लिए नहीं हो रहा है तो अनुदान की अदायगी रोकी जा सकती है ।
(7) संस्था भारत के समस्त नागरिकों के लिए जाति, पंथ या वर्ग भेदभाव के बिना खुली रहेगी । जिस राज्य में संस्था स्थित हो, उसे बाहर से राज्यों के लोगों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा ।
(8) जिस काम के लिए अनुदान स्वीकृत हुआ हो, उसके संबंध में संस्था भारत सरकार के अनुदेशों और सुझावों के पालन के लिए बाध्य होगी । भारत सरकार किसी भी विषय पर कोई सूचना या माँगे जाने पर संस्था मंत्रालय निर्धारित अवधि के अंदर उसे केंद्रीय हिंदी निदेशालय को भेजेगी ।
2. भवन निर्माण के लिए सहायता :-
  इस योजना के अंतर्गत भवन (भवनों) का निर्माण, भवन (भवनों) का विस्तार, भवन (भवनों) की मरम्मत और अति दुर्लभ और अति परिस्थितियों में भवन की खरीद हेतु सहायता पर विचार किया जाएगा ।
  स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं/ संगठनों को भवन-निर्माण के लिए सहायता के संबंध में निम्नलिखित  शर्तों का पालन करना होगा :-
 
(i) भवन निर्माण हेतु अनुदान के प्रस्ताव पर विचार करने से पूर्व यह आवश्यक है कि संबंधित प्रस्ताव के संबंध में पहले तीन सदस्यीय केंद्रीय निरीक्षण दल संबंधित संस्था का निरीक्षण किया गया हो । निरीक्षण दल में केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अधिकारी/ केंद्रीय अनुदान समिति का सदस्य तथा मंत्रालय से एक प्रतिनिधि भी अवश्य होना चाहिए ।
(ii) भवन निर्माण हेतु अनुदान के संबंध में केवल उन्ही स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं के आवेदन - प्रस्ताव विचारणीय होगा जो हिंदीतर भाषी क्षेत्र में स्थित हैं । जिसके लिए अनुदान माँगा जा रहा है वह भी हिंदीतर भाषी क्षेत्र में स्थित होना चाहिए । भवन निर्माण हेतु अनुदान का प्रस्ताव केंद्रीय अनुदान समिति में रखने से पूर्व संबंधित संस्था/ संगठन की कानूनी स्थिति (Legal Status), निर्माण तथा उसके पूर्व में किए गए कार्यो के संबंध में केंद्रीय हिंदी निदेशालय को (Ascertained) हो लेना चाहिए । जिस भूमि पर भवन निर्माण हेतु अनुदान के लिए प्रार्थना की जा रही है वह भूमि रूप से आवेदक संस्था/ संगठन के नाम पंजीकृत होनी चाहिए ।
(iii) संस्था/ संगठन को भवन निर्माण के संबंध में अपनी कार्य निष्पादन योजना, कार्यान्वित करने वाली एजेंसी आदि से संबंधित दस्तावेज़ अग्रिम रूप से प्रस्तुत करना होगा ।
(iv) इस योजना के अंतर्गत भूमि की खरीद हेतु अनुदान के प्रस्ताव विचारणीय नहीं हैं ।
(v) भवन निर्माण हेतु अनुदान के केवल वही प्रस्ताव विचारणीय होंगे जो संबंधित राज्य सरकार   विधिवत् अग्रेषित किए जाएँगे । आवेदक संस्था/ संगठन   भवन निर्माण हेतु लागत अनुमान/ बजट प्राक्कलन, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग/ लोक निर्माण विभाग के सक्षम प्राधिकारी पुनरीक्षित होना चाहिए ।
(vi) यदि स्वैच्छिक हिंदी संस्था/ संगठन भवन निर्माण पूरा होने से पहले या बाद में किसी समय अपनी गतिविधियाँ बंद कर देती है तो अनुदान की संपूर्ण राशि निर्धारित ब्याज सहित सरकार को वापस करनी होगी । स्वैच्छिक हिंदी संस्था/ संगठन की गई किसी भी त्रुटि/ चूक के मामले में इस योजना के अंतर्गत अनुदान से पूर्णरूप से अथवा आंशिक रूप से निर्मित का अधिग्रहण केंद्रीय हिंदी निदेशालय/ भारत सरकार कर लिया जाएगा ।
(vii) अनुदान ग्राही संस्था/ संगठन को नोटरी पब्लिक विधिवत् सत्यापित समुचित मूल्य के स्टैंप पेपर पर दो जमानतियों के साथ जमानत बंध-पत्र प्रस्तुत करेगा ।
(viii) भवन निर्माण हेतु अनुदान किस्तों में निम्नलिखित  के अनुसार (release) किया जाएगा :-
 
(क) अनुदान की प्रथम किस्त कुल स्वीकृत अनुदान के 40 प्रतिशत के बराबर अथवा 20 लाख रुपए, जो भी कम हो, की होगी ।
(ख) अनुदान की किस्त कुल स्वीकृत अनुदान के 40 प्रतिशत के बराबर अथवा 20 लाख रुपए, जो भी कम हो, की होगी । अनुदान की किस्त निर्माण कार्य की प्रगति से होने तथा प्रथम किस्त के रूप में किए गए अनुदान में से कम-से-कम 75 प्रतिशत अनुदान के परीक्षित लेखे प्राप्त होने पर ही की जाएगी । 
(ग) अनुदान की अंतिम किस्त केंद्रीय लोक निर्माण विभाग / लोक निर्माण विभाग के कार्यपालक इंजीनियर अथवा इसी के अधीक्षण इंजीनियर (सुपरिटेंडिंग इंजीनियर) से समस्त भवन निर्माण संबंधी कार्य समापन का प्रमाण-पत्र और लेखों के लेखा परीक्षण विवरण प्राप्त होने के बाद जारी की जाएगी ।
(ix) भवन निर्माण से संबंधित सभी प्रस्तावों पर  रूप से गुणावगुणों के आधार पर विचार किया जाएगा । किसी भी मामले में इन पर नेमी (routine) मामलों की तरह विचार नहीं होगा । केवल वास्तव में सुपात्र मामलों में ही भवन-निर्माण हेतु अनुदान पर विचार होगा ।
(x) केंद्रीय हिंदी निदेशालय / मानव संसाधन विकास मंत्रालय को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी समय निर्माण कार्य की जाँच करें और यदि यह पाया जाए कि निर्माण कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं है तथा अनुदान राशि का उपयोग अन्य के लिए किया गया है तो अनुदान की अगली किस्तों  की अदायगी रोक दी जाएगी । संस्था / संगठन केंद्रीय सरकार अथवा राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों की जाँच के लिए खुला रहेगा । अनुदान के संबंध में सभी नियम व शर्तों का पालन बाध्य होगा ।
(xi) भवन निर्माण हेतु सहायता पर विचार के लिए केंद्रीय अनुदान समिति की बैठक की अध्यक्षता अपर सचिव ( शिक्षा ) की जाएगी । अन्य  मामलों में  केंद्रीय अनुदान समिति की बैठक की अध्यक्षता सचिव ( भाषा ) की जाएगी । स्
   
  सहायता की सीमा :-
  सहायता के लिए सभी आवेदनों पर गुणावगुणों के आधार पर विचार किया जाएगा और अनुदान खर्च की केवल अनुमोदित मदों के लिए ही मंजूर किया जाएगा । हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ भवन-निर्माण की गतिविधियों के लिए मंज़ूर अनुदान राशि कुल अनुमोदित व्यय के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी । फिर भी भवन-निर्माण से संबंधित गतिविधियों के लिए अनुदान निम्नलिखित के अनुसार जारी होगा :-
 
(i) स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं / संगठनों के भवन निर्माण / बड़ी मरम्मतों के मामलों में अनुदान 5 लाख रुपए अथवा कुल अनुमोदित व्यय के 75 प्रतिशत, जो भी कम हो, से अधिक नहीं होगा । इस के लिए केवल वे ही स्वैच्छिक हिंदी संस्थाएँ पात्र होंगी जिन्होंने हिंदीतर भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए कार्य किया हो और जो पिछले 10 वर्ष से अधिक समय से सक्रिय रूप से संचालित की जा रही हों । इस खंड के अंतर्गत कोई भी राशि करने से पूर्व केंद्रीय अनुदान समिति की सिफारिशें, एकीकृत प्रभाग की सम्मति तथा सचिव, माध्यमिक और उच्चतर शिक्षा विभाग का अनुमोदन आवश्यक होगा ।
(ii) स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं के भवन निर्माण के लिए 5 लाख रुपए से 20 लाख रुपए अथवा कुल अनुमोदित व्यय के 75 प्रतिशत, जो भी कम हो, के अनुदान के लिए उन्हीं संस्थाओं के प्रस्तावों पर विचार होगा जिन्होंने हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए  कार्य किया हो और जो पिछले 20 वर्ष से सक्रिय रूप से संचालित की जा रही हों । इस खंड के अंतर्गत कोई भी राशि करने से पूर्व केंद्रीय अनुदान समिति की सिफारिशें, एकीकृत प्रभाग की सम्मति तथा मानव संसाधन विकास मंत्री जी का अनुमोदन आवश्यक होगा ।
(iii) स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं के भवन निर्माण के लिए 20 लाख रुपए से 50 लाख रुपए अथवा कुल अनुमोदित व्यय के 75 प्रतिशत, जो भी कम हो, के अनुदान के लिए विशेष परिस्थितियों में केवल उन्हीं संस्थाओं के प्रस्तावों पर विचार होगा जिन्होंने हिंदीतर भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए  तथा सराहनीय कार्य किया हो और जिनका स्वरूप अखिल भारतीय स्तर का हो तथा जो पिछले 30 वर्ष से सक्रिय रूप से विधिवत रूप से संचालित की जा रही हों । इस खंड के अंतर्गत कोई भी राशि करने से पूर्व केंद्रीय अनुदान समिति की सिफारिशें, एकीकृत प्रभाग की सम्मति तथा माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री जी का अनुमोदन आवश्यक होगा ।
(iv) अति अपवाद स्वरूप परिस्थितियों, जिनका लिखित रूप में रिकार्ड हो, के अंतर्गत भवन-निर्माण हेतु 50 लाख रुपए से 1 करोङ तक  रुपए के अनुदान के लिए उन्हीं संस्थाओं के प्रस्तावों पर विचार होगा जिन्होंने हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए असाधारण तथा अति  कार्य किया हो और जो पिछले 50 वर्षों से सक्रिय रूप से संचालित की जा रही हों । इस खंड के अंतर्गत कोई भी राशि करने से पूर्व केंद्रीय अनुदान समिति की सिफारिशें, एकीकृत प्रभाग की सम्मति तथा माननीय मानव संसाधन विकास मंत्री जी का अनुमोदन आवश्यक होगा ।
  आवेदन-पत्र प्रस्तुत करने की प्रक्रिया :-
  हिंदी के प्रचार-प्रसार की गतिविधियों और भवन निर्माण की गतिविधियों -- दोनों योजनाओं में से प्रत्येक के लिए अलग-अलग आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा ।
  हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सहायता संबंधी सभी अनुरोध निर्धारित आवेदन पत्र में केंद्रीय हिंदी निदेशालय के गुवाहाटी, कोलकाता, चेन्नै तथा हैदराबाद स्थित संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के उपनिदेशक (भाषा) को भेजे जाने चाहिए । संबंधित कार्यालयों के उपनिदेशक (भाषा) सभी आवेदन पत्रों की जाँच करेंगें और प्रस्ताव इसी से गठित राज्यस्तरीय अनुदान समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत करेंगें बाद में राज्यस्तरीय अनुदान समिति की संस्तुति के साथ आवेदन पत्र केंद्रीय अनुदान समिति की बैठक से पूर्व निर्णय के लिए केंद्रीय हिंदी निदेशालय में भेजे जाएँगे । अखिल भारतीय स्वरूप की संस्थाओं / संगठनों से प्राप्त होने वाले अनुदान संबंधी अनुरोध, यदि आवश्यक हो तो, केंद्रीय सरकार सीधे किए जा सकते हैं । जो संगठन उन क्षेत्रों में स्थित हैं जो किसी भी उपनिदेशक (भाषा) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते, उनके आवेदन-पत्र निदेशक, केंद्रीय हिंदी निदेशालय को सीधे भेजे जाऍ । निदेशालय इन प्रस्तावों की जाँच की जाएगी और प्रस्ताव राज्यस्तरीय अनुदान समिति की संस्तुति के साथ आवेदन पत्र केंद्रीय अनुदान समिति के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किए जाएँगे । स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं के भवन निर्माण संबंधी आवेदन पत्र भी निर्धारित प्रपत्र पर केंद्रीय हिंदी निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालयों में विचारार्थ प्रस्तुत किए जाने चाहिए । केवल भवन निर्माण संबंधी आवेदन पत्रों का राज्य सरकारों के माध्यम से होना आवश्यक है ।
  राज्य सरकार/ निदेशक, केंद्रीय हिंदी निदेशालय नई दिल्ली, क्षेत्रीय उपनिदेशक (भाषा) केंद्रीय हिंदी निदेशालय संगठन के अनुरोध की जाँच करेगा और अपनी सिफारिश करते समय निम्नलिखित बातों का उल्लेख करेगा :-
 
(क) कि संगठन एक संस्थापित दक्षता और योग्यता वाली संस्था है ।
(ख) कि अनुशंसित योजना हिंदी को बनाने / उसका प्रचार करने / उसको बढ़ावा देगी (कृपया ब्यौरा दें) ।
(ग) प्राक्कलनों की जाँच कर ली गई है और उन्हें उचित पाया गया है ।
(घ) उस राशि का उल्लेख किया जाए जिसकी वह संगठन/ संस्था को अदा करने के लिए केंद्रीय सरकार से सिफारिश करते हैं ।
(ङ) कोई अन्य उपयोगी सूचना जिसे वह संगठन/ संस्था के अनुरोध के संबंध में देना चाहेंगे ।
  किसी आवेदन पत्र के संबंध में सिफारिश करने से पूर्व केंद्रीय हिंदी निदेशालय के क्षेत्रीय कार्यालयों (उपनिदेशक भाषा) / राज्य सरकार, जैसी भी स्थिति हो, संगठन आदि की सत्यता और उस काम की उपयोगिता तथा आवश्यकता के संबंध में अपने आप को कर लें जिसके लिए अनुदान माँगा गया है ।
  प्रत्येक आवेदन पत्र निम्नलिखित सूचना और दस्तावेजों सहित निर्धारित प्रपत्र में प्रस्तुत किया जाना चाहिए :-
 
1 संस्था/ संगठन के और क्रियाकलाप के संबंध में एक विवरण ।
2 क्या संस्था/ संगठन एक पंजीकृत संस्था है ?
3 प्रबंध बोर्ड की संरचना / संविधान ।
4 उपलब्ध वार्षिक रिपोर्ट ।
5 संगठन के पिछले तीन वर्षों के लेखा परीक्षित लेखों की एक प्रति और अंतिम तुलन पत्र की एक प्रति । उस वर्ष के संबंध में संगठन को आय-व्यय के प्राक्कलन भी भेजे जाएँ जिसके लिए अनुदान संबंधी  आवेदन किया गया है ।
6 राज्य सरकारों अथवा अन्य निकायों से अब तक अनुदानों का एक विवरण, जिसके लिए प्रत्येक मामले में यह बताया जाए :-
(क) कि किस के लिए अनुदान किया गया था ।
(ख) कि उसका कब और कैसे उपयोग किया गया ।
(ग) इस दिशा में की गई प्रगति जिसके लिए सहायता दी गई थी, और
(घ) कि क्या पिछली सहायता से संबंधित सभी शर्तों का विधिवत् पालन किया गया ।
7 विचाराधीन योजना के लिए अनुदान हेतु किन्ही अन्य निकायों को, यदि कोई हो, किए गए अनुरोध से संबंधित सूचना । इस प्रकार के अनुरोधों पर उन निकायों के निर्णयों से भी केंद्रीय हिंदी निदेशालय/ केंद्रीय हिंदी निदेशालय के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के उपनिदेशक (भाषा) को सूचित किया जाए ।
8 इस आशय का एक शपथ पत्र कि योजना के प्राक्कलनों को एक बार उचित रूप से अनुमोदित कर दिया गया है और इन प्राक्कलनों के आधार पर अनुदान का मूल्यांकन कर लिया जाता है तो उन्हें राज्य और केंद्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन के बिना संस्था/ संगठन संशोधित नहीं किया जाएगा ।
9 जिस वर्ष के लिए अनुदान माँगा गया हो, उस वर्ष के पिछले वर्ष की 30 जनवरी तक के या उससे पहले के पूरे विवरण सहित सभी प्रार्थना-पत्र दो प्रतियों में, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों के उपनिदेशक (भाषा) के पास पहुँच जाने चाहिए ।
10 जो परियोजनाएँ भारत सरकार के अनुदान से आरंभ की जानी हों उनमें कार्य करने वाले कर्मचारी वर्ग की योग्यताएँ और अनुभव का विवरण भारत सरकार की परियोजना का काम शुरू करने से पहले भेजना होगा ।
 
 
 
Index
NEXT
 
मुख्य पृष्ठ