केंद्रीय हिंदी निदेशालय (उच्चतर शिक्षा विभाग)
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अपने संगठन की विशिष्टियां, कृत्य और कर्तव्य

संविधान के अनुच्छेद 351 में निहित विशेष निदेशों के अनुपालन के लिए राष्ट्रपति के आदेशानुसार  सन् 1960 में केंद्रीय हिंदी निदेशालय की स्थापना हुई | उपर्युक्त  अनुच्छेद है:-
" हिंदी भाषा की प्रसार वृदधि करना, उसका विकास करना ताकि वह भारत की सामाजिक संस्कृति के सब तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम हो सके, तथा उसकी आत्मीयता में हस्तक्षेप किए बिना हिंदुस्तानी और अष्टम अनुसूची में उल्लिखित अन्य भारतीय भाषाओँ के रूप, शैली और पदावली को आत्मसात करते हुए जहाँ तक आवश्यक या वांछनीय हो वहां उसके शब्द भंडार के लिए मुख्यत: संस्कृत से तथा गौणतः अन्य भाषाओँ से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृधि सुनिश्चित करना संघ का कर्तव्य होगा |"
नीति निर्माता हिंदी को इस रूप में विकसित करने के इच्छुक थे कि वह भारत की सामाजिक संस्कृति के सब तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके | इसीलिए उन्होंने इसे संघ सरकार का कर्तव्य माना | उपर्युक्त नीति निदेशों से अपनी प्रतिबद्धता ग्रहण करते हुए, निदेशालय संविधान में निहित की पूर्ति के लिए, कई योजनाओं को कार्यान्वित कर रहा है तथा इस प्रकार वह हिंदी के संवर्धन में संघ सरकार के कर्तव्यों का मूर्त रूप से निर्वाह कर रहा है |
निदेशालय का सचिवालय नई दिल्ली में स्थित है | इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय कोलकाता, गुवाहाटी, हैदराबाद तथा चेन्नई में हैं |
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क्षेत्रीय कार्यालय तथा उनके पते

1.
उपनिदेशक (पूर्व)
केंद्रीय हिंदी निदेशालय 
1, कौंसिल हाउस स्ट्रीट
प्रथम तल, कोलकाता,
aa बंगाल -700001
  (अधिकार क्षेत्र : बंगाल, उड़ीसा, बिहार तथा झारखंड)
2.
उपनिदेशक (उत्तर - पूर्व)
केंद्रीय हिंदी निदेशालय 
द्वारा - दास एंटरप्राइजिस
जय नगर, खानापाड़ा,
गुवाहाटी - 781019 असम
  (अधिकार क्षेत्र : असम, मणिपुर, त्रिपुरा, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय   तथा मिजोरम)
3.
उपनिदेशक (दक्षिण - aa
केंद्रीय हिंदी निदेशालय 
 केंद्रीय सदन, खंड - ए,
सुल्तान बाज़ार,
हैदराबाद - 500009 आंध्र प्रदेश
  (अधिकार क्षेत्र : आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र तथा गोवा)
4.
उपनिदेशक (दक्षिण) 
केंद्रीय हिंदी निदेशालय 
प्रथम तल, खंड-5,
हैडोस रोड, शास्त्री भवन,
चेन्नई - 600006 तमिलनाडु
  (अधिकार क्षेत्र : तमिलनाडु, कर्नाटक तथा केरल)
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कृत्य और कर्तव्य

संघ सरकार का यह मुख्य संस्थान अखिल भारतीय स्तर पर हिंदी को राष्ट्रिय भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने एवं हिंदी के माध्यम से भारत के लोगों के बीच एकता और अखंडता स्थापित करने के निहित उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु कड़ी मेहनत कर रहा है तथा निम्नलिखित गतिविधियों दवारा वैश्विक स्तर पर हिंदी के उचित स्थान को सुनिश्चित कर रहा है:
1.
पत्राचार पाठ्यक्रम : हिंदीतर- भाषी भारतीयों तथा विदेशियों को द्वितीय तथा विदेशी भाषा के रूप में हिंदी पढ़ाना | प्रति वर्ष लगभग 10,000  विद्यार्थियों को हिंदी सिखाई जाती है |
2.
प्रकाशन : हिंदी और क्षेत्रीय तथा विदेशी भाषाओँ के परस्पर भाषामूलक कोश तैयार करना तथा हिंदी के शिक्षार्थियों, विद्वानों तथा उच्च श्रेणी के शिक्षकों के लिए मानक संदर्भ सामग्री प्रकाशित  करना |   निदेशालय दवारा द्विभाषी, त्रिभाषी तथा बहुभाषी कोश एवं वार्तालाप पुस्तिकाएँ तैयार की जा रहीं हैं | इसके अतिरिक्त मानक पत्रिकाएँ और आवधिक - भाषा, वार्षिकी एवं साहित्यमाला - भी प्रकाशित की जाती हैं |
3.
विस्तार कार्यक्रम :
 
(i)
हिंदीतर भाषी नवलेखकों को हिंदी साहित्य की विविध विधाओं की अधुनातन प्रवृत्तियों से परिचित कराने हेतु शिविर आयोजित करना :
(ii)
छात्र अध्ययन यात्रा : प्रतिवर्ष हिंदीतर-भाषी हिंदी छात्रों के लिए अध्ययन यात्राएं आयोजित की जाती हैं |
(iii)
प्राध्यापक व्याख्यान यात्राएं : ये यात्राएं हिंदीतर-भाषी क्षेत्रों के प्राध्यापकों तथा हिंदीभाषी क्षेत्रों के प्राध्यापकों के बीच विचार- विनिमय का एक मंच प्रदान करती हैं |
(iv)
शोध छात्र अनुदान : हिंदी में शोध कार्य करने हेतु हिंदीतर भाषी छात्रों को अनुदान दिया जाता है |
(v) पुरस्कार : हिंदीतर भाषी क्षेत्रों के हिंदी लेखकों को हिंदी में उत्कृष्ट लेखन के लिए प्रतिवर्ष एक-एक लाख रुपए के 19 पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं | विज्ञान, प्रोद्योगिकी, शिक्षा तथा शिक्षा नीति पर हिंदी/ हिंदीतर भाषी लेखकों दवारा हिंदी में प्रकाशित उत्कृष्ट मौलिक पुस्तकों के लिए 5 लेखकों को भी शिक्षा पुरस्कार देने का प्रावधान है |
4.
स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं को अनुदान : देश के हिंदीतर-भाषी राज्यों में कार्य कर रही स्वैच्छिक हिंदी संस्थाओं को वित्तीय सहायता दी जाती है | यह एक ऐसी अदवितीय योजना है जिसका उददेश्य अपने-अपने क्षेत्रों में हिंदी को बढ़ावा देने में स्वैच्छिक रूप से कार्यरत व्यक्तियों के माध्यम से हिंदी का प्रचार-प्रसार करना है और इस प्रकार सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में निजी भागीदारी सुनिश्चित होती है |
5.
प्रत्येक योजना से संबंधित विवरण अलग से देखे जा सकते हैं |
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