केंद्रीय हिंदी निदेशालय (उच्चतर शिक्षा विभाग)
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हिंदी का उद्भव
   
 

आधुनिक हिंदी

 
 
अपभ्रंश का ह्रास तथा आधुनिक हिंदी का
सन् 1283 ई० –
खुसरो की पहेलियाँ एवं मुकरियाँ । खुसरो ने अपनी भाषा के लिए “हिंदवी” शब्द का प्रयोग किया ।
सन् 1398 - 1518 ई० –
कबीर की रचनाओं से निर्गुण (काव्य धारा) काल का प्रारंभ ।
सन् 1370 ई० –
सूफी कवि असाहत “हंसावली” की रचना से सूफी प्रेमगाथा-काव्य काल का आरंभ ।
सन् 1400 - 1479 ई० –
महान अपभ्रंश काव्य परंपरा के अंतिम कवि 'रयधू' ।
सन् 1450 ई० –
आचार्य रामानंद के प्रभाव से सगुण   काव्य धारा का आरंभ ।
सन् 1580 ई० –
बुरहानुद्दीन जानम की 'कलमीतुल – हकायत' प्रारंभिक दक्खिनी साहित्य रचना ।
सन् 1585 ई० –

संत कवि नाभादास कृत 'भक्‍तमाल' : हिंदी भक्‍त कवियों का परिचयात्मक ग्रंथ  ।

सन् 1601 ई० –
बनारसीदास रचित अर्ध कथानक : हिंदी की प्रथम आत्मकथा ।
सन् 1604 ई० – 'आदि ग्रंथ' में गुरु अर्जुन देव अनेक कवियों की रचनाओं का संग्रह ।
सन् 1532 - 1623 ई० – 'रामचरितमानस' महाकाव्य के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास का जीवन काल ।
सन् 1623 ई० – जटमाल रचित 'गोरा बादल की कथा' : खड़ी बोली का प्रथम -ग्रंथ ।
सन् 1643 ई० – आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार रीति-काव्य परंपरा का प्रारंभ ।
सन् 1645 ई० – शाहजहाँ दिल्ली में लाल किले का निर्माण । स्थानीय भाषा को 'उर्दू' कहा जाने लगा ।
सन् 1667 - 1707 ई० – वली की रचनाएँ लोकप्रिय हुईं ।  दिल्ली के अभिजात वर्ग में फारसी का स्थान उर्दू ने लेना प्रारंभ किया, जिसे साधारणत: सौदा मीर आदि 'हिंदी' कहा गया ।
सन् 1600 - 1825 ई० –

बिहारी, आदि कवियों को ओरछा नरेश तथा अन्य सामंतों राज्याश्रय प्राप्‍त  हुआ ।

 
     
 
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