केंद्रीय हिंदी निदेशालय (उच्चतर शिक्षा विभाग)
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हिंदी का उद्भव
   
 

परिचय

 
 

हिंदी भाषा प्राचीन आर्य भाषा संस्कृत की मूल वंशजा है जो मध्यकालीन आर्यभाषाओं - प्राकृत एवं अपभ्रंश की भाषिक परंपराओं से अपना स्वरूप ग्रहण करती हुई विकसित हुई है । यह द्रविड़, तुर्की, फारसी, अरबी, पुर्तगाली, तथा अंग्रेज़ी भाषाओं के प्रभावों को अपनी व्यापकता में समेटती रही है तथा इन विभिन्‍न भाषिक विशेषताओं के वैविध्य से स्वयं होती रही है । हिंदी भाषा एक अत्यंत अभिव्यंजक भाषा है । इसके साहित्यिक तथा लोकप्रचलित काव्य एवं गीतों में प्रांजल एवं मधुर शब्दावली का सहज प्रयोग भावों की बोधगम्यता को और भी सरल और संप्रेषणीय बना देता है । यही नहीं, अपने गंभीर एवं भाषिक स्वरूप के कारण हिंदी सटीक तथा विवेचन हेतु भी प्रयुक्‍त होने में सर्वथा समर्थ है । हिंदी का संबंध भारोपीय भाषा परिवार की उपशाखा भारत-ईरानी (अथवा आर्यशाखा) के भारतीय आर्यशाखा समूह से है । इसे भारत संघ की राजभाषा होने का गौरव प्राप्‍त है तथा इसकी लिपि देवनागरी है । हिंदी लगभग 18 करोड़ से भी अधिक भारतवासियों की मातृभाषा है । 30 करोड़ से अधिक लोगों ने इसे भाषा के रूप में अपनाया है । देश की भौगोलिक सीमाओं से बाहर अन्य देशों में हिंदी बोलने वालों की संख्या पर डालें तो यह संख्या संयुक्‍त राज्य अमेरिका में 1,00,000, मॉरीशस में 6,85,170, दक्षिण अफ्रीका में 8,90,292, यमन में 2,32,760, युगांडा में 1,47,000, सिंगापुर में 5,000, नेपाल में 80 लाख, न्यूज़ीलैंड में 20,000 तथा जर्मनी में 30,000 ठहरती है ।

 
 
 
 
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